ये शिक्षा भी जरूरी है...


      शिक्षा” शब्द सुनते ही क्या विचार आता है? यही न की शिक्षा आज के जीवन में बेहद जरूरी है, क्योंकि पढ़ाई नहीं की तो अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी। और आज के इस डिजिटल युग में हम पीछे रह जाएंगे। शायद इससे ज्यादा हम शिक्षा के महत्व को समझ ही नहीं पाते। क्योंकि आजके इस दौड़ते भागते जीवने में हम अपनी जरूरतों से ज्यादा कुछ सोच ही नहीं पाते।

       जहां तक हमारी जरूरते होती है, बस वही तक हम गंभीरता से विचार करते है। लेकिन क्या हमारी जरूरते ही हमारे जीवन के गंभीर विषय है। क्या आपने कभी विचार किया है। शिक्षा क्या है इसका क्या महत्व है? शिक्षा का असल में उदेश्य क्या है?  

ye siksha bhi jaruri hai charitr nirman   










  “शिक्षा ज्ञान प्राप्ति का एक माध्यम है।” शिक्षा से ही हमे सही गलत का भेद पता चलता है। जीवन में हम कैसे सही निर्णय ले उसकी समझ आती है। पहले शिक्षा का मूल उदेश्य मनुष्य का चरित्र निर्माण करना होता है, लेकिन अब इस और हमारा ध्यान केन्द्रित ही नहीं है। स्कूल में नैतिक शिक्षा पढ़ाई जरूर जाती है और हम पढ़ते भी है। बस पढ़ते ही है, उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास नहीं करते, क्योंकि अब इसे हम सिर्फ किताबी ज्ञान समझ बैठे है। 

      माता-पिता सिर्फ उतना ही पढ़ाते है, जितना परीक्षा में पास होने के लिए जरूरी होता है। शिक्षक उतना ही पढ़ाते है जितना किताबों मे होता है। कुल मिलकर देखा जाये तो न जरूरत से ज्यादा न पढ़ाया जाता है और न ही पढ़ा जाता है। हम अपनी जरूरत तक सीमित होकर रह गए है।

      यही कारण हैआज समाज में इतनी अनैतिकता और आपराधिक मानसिकता बढ़ती जा रही है, क्योंकि मनुष्य की जरूरत उससे कुछ भी करवा लेती है। इसलिए आवश्यक है कि हम शिक्षा को अपनी जरूरओ को पूरा करने का माध्यम के बजाय उत्तम चरित्र निर्माण का माध्यम बनाए।